पूर्णप्रमात्मा कबीर चारों युगों में आते हैं । अपना तत्वज्ञान बताकर अच्छी आत्माओं का उद्धार करते हैं। चारों युग मे हम पुकारे कुक कहा हम हेल रे । हीरे मानक मोती बरसे ये जग चुगता ढेल रे।। सतयुग में सतसुकृत कह टेरा त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा।। द्वापर में करुणामय कहाया कलयुग में कबीर नाम धराया।। चारो युगों में परमेश्वर कबीर साहेब जी सशरीर जल के ऊपर कमल के फूल …
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