किसान रक्षक सम्मान 2025 सन्त रामपाल जी महाराज
हरियाणा के हिसार ज़िले के गांव गुराना में आज, 9 नवम्बर 2025 का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया, जब समाज सुधारक और सतलोक आश्रम बरवाला के संस्थापक सन्त रामपाल जी महाराज जी को दूसरी बार “किसान रक्षक सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें हरियाणा में आई भयंकर बाढ़ आपदा के दौरान किसानों और ग्रामीणों की सहायता के लिए प्रदान किया गया।
जब हरियाणा के सैकड़ों गाँव बाढ़ के पानी में डूबे हुए थे, तब चारों ओर तबाही का मंजर था। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी थीं, लोगों के घरों में पानी भर गया था, और ग्रामीण जनजीवन ठप पड़ गया था। ऐसे संकट के समय में सन्त रामपाल जी महाराज जी के निर्देश पर सतलोक आश्रम बरवाला और उनके अनुयायियों ने एक अद्वितीय मानवता की मिसाल पेश की। उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के, निःस्वार्थ भाव से 300 से अधिक गांवों में जाकर पाइप, मोटर, डीज़ल इंजन, और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराई।
आश्रम के सेवादारों ने दिन-रात मेहनत करके किसानों के खेतों और घरों से पानी निकाला। किसी ने मोटरें चलाईं, किसी ने पाइप जोड़े, तो किसी ने अपने ट्रैक्टर और संसाधन लगाए। इन सेवाओं के कारण सैकड़ों किसानों को अपनी फसल और जीवन दोबारा संभालने का अवसर मिला। यह कार्य किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि सन्त रामपाल जी महाराज जी की प्रेरणा और उनके उपदेशों की भावना से हुआ — “सेवा ही सच्ची भक्ति है।”
गांव गुराना (हिसार) में आयोजित समारोह में स्थानीय किसानों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं ने एकमत होकर कहा कि सन्त रामपाल जी महाराज जी ने जो सेवा कार्य किया, वह आज के समय में समाज के लिए प्रेरणा है। जब अधिकतर लोग केवल देखने तक सीमित थे, तब सतलोक आश्रम के अनुयायी राहत कार्य में जुटे हुए थे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इस बाढ़ राहत अभियान ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता की सेवा में प्रकट होता है। यह “किसान रक्षक सम्मान” केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक है जो इंसानियत को सर्वोपरि मानती है।
यह दूसरा किसान रक्षक सम्मान इस बात का प्रमाण है कि सन्त रामपाल जी महाराज जी के कार्य केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान की दिशा में भी मील का पत्थर हैं। उनके अनुयायी हमेशा जनसेवा के कार्यों में अग्रणी रहते हैं — चाहे वह रक्तदान शिविर हो, पौधारोपण अभियान हो, नशा मुक्ति जागरूकता हो या आपदा राहत सेवा।
समारोह के अंत में किसानों और ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा — “जब हम सब असहाय थे, तब सतलोक आश्रम के सेवादार हमारे लिए भगवान बनकर आए।” आयोजकों ने कहा कि ऐसे संत ही भारत की सच्ची पहचान हैं, जो केवल प्रवचन नहीं करते, बल्कि अपने कर्मों से समाज को दिशा देते हैं।
आज का यह दिन इस बात का साक्षी है कि जब भी मानवता संकट में होती है, तब सच्चे संत और उनके अनुयायी ही समाज के सच्चे रक्षक बनकर सामने आते हैं।
इसलिए 9 नवम्बर 2025 का यह दिन सदैव याद रखा जाएगा — जब सन्त रामपाल जी महाराज जी को मिला “किसान रक्षक सम्मान” समाज के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया।

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