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कलयुग में सतयुग

दैनिक प्रेरक कहानी


 विड सम्पूर्ण_विश्व_में_काबीर_ज्ञान_फैलने_की_प्रक्रिया: -

"वाल्मीक तुलसी से कह गये, ऐसा कलियुग आयेगा,

         ब्राह्मण होके वेद ना जानै, मिथ्या जन्म गवायेगा!
             बेटा होके माता-पिता ना चीन्हें, त्रिया से नेह लगायेगा,
                  और त्रिया होके पति ना चीन्हें, आन पुरुष मन भायरे !! "

"जब-जब बढ़े असुर और अभिमानी तब-तब धरू मानव का देहा और हरु सकल देश की पीरा।"

'पहले बोधू कोली चमारा पीछे हो राजदरबार फिर बोधू पंडित काजी फिर सकल संसारा।'

कलियुग मध्य सतयुग ल्याऊँ, तातै सत्य कबीर कहाऊँ।

भगवान ने कबीर सागर में वर्णन कर रखा है कि यह तत्वज्ञान पूरी दुनिया में किस प्रकार फैलेगा .. भगवान ने बताया है कि ..

(पहले भोड़ू कोली चमरा) ।।

परमात्मा सबसे पहले अपना ज्ञान देकर कोली चमारा अर्थात् मध्यम वर्ग के लोगों को अपनी शरण में लेंगे जैसे आज के मालिक के शरण में हम सब मध्यम वर्ग (मध्यम वर्ग) के निर्धन लोग है। कोई भी उच्च वर्ग का भगत नहीं है सब मध्यम वर्ग के भगत है जी।

(पीछे होना राजदरबार) ।।

फिर परमात्मा राजदरबार का नम्बर लेंगे अर्थात् रजनेता जज अफसर मीडिया इस चांडाल चौकड़ी को ठीक करेंगे। परमात्मा ने राजदरबार को ठीक करने के लिए ही यह लीला रची है। भ्रष्ट राजदरबार को ठीक करने के लिए ही मालिक यह लीला कर रहा है जी।

नस्त्रेदमस ने कहा है कि वह शायरण सत्वधारी चंडाल चौकड़ियों को चरस्त कर अपने दम पर सता पे काबिज होगा। सताधारी चंडाल चौकड़ियों पर उसकी सता होगी।

जयगुरुदेव वाले तुलसी दास जी ने अपनी भविष्यवाणी में कहा है कि जब उस संत का शासन आयेगा तब राजनेता (जो सन्त द्वारा नियुक्त होंगे) घर-घर जाकर लोगों से पूंछा करेंगे कि आपके पास राशन पानी है या नहीं और आपको अपनी समस्या तो नहीं है। । भविष्यवक्ता फ्लोरेंस ने कहा है कि भारत के एक दिव्य महापुरुष की विचारधारा से भारत में आध्यात्मिक लोग सत्ता में आयेंगे और उनके विचारधारा को पूरे विश्व में फैलाएंगे।

(फिर बोधू पंडित काजी) .. राजदरबार के बाद पंडित काजी अर्थात् सभी धर्मों के धर्मगुरुओं का नम्बर आयेगा। परमात्मा ये सभी नकली धर्मगुरुओं को ठीक करेंगे क्योंकि परमात्मा के मार्ग में सबसे बडा रोडा यही अटक गया है। विश्वस्तरीय आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा में इन परास्त कर, उनकी अज्ञान की पोल खोलकर जनता को जागृत किया जाएगा। सार्वजनिक आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा को देखकर, ज्ञान और अज्ञान से परिचित इन सभी नकलियों को छोड़कर मालिक की शरण में दौड़ी चली आयेगी।

(फिर से सकल संसारा) .. नकली धर्मगुरुओं का ज्ञान चर्चा में परास्त होने के बाद परमात्मा का यह अमृत तत्वज्ञान फुल गति से पूरी दुनिया में फैलेगा। सभी संसार में यह ज्ञान निर्बह फैलेगा। मालिक की आज्ञानुसार केवल कार्य करना होगा।

परमात्मा कहते हैं कि ...

           'कलियुग मध्य सतना ल्याऊँ, तातै सत्य कबीर कहाऊँ'

"कलियुग बीते पचपन सौ पाचा (5505), तब यह वचन मेरा होगा साचा, कलियुग बीत गया जब ऐता, सब जीव परम पुरुष पद चेता।"

परमात्मा ने 600 वर्ष पहले धर्मदास जी से कहा था कि जब कलियुग 5505 वर्ष बीत जाएंगे तब मेरा यह वचन साबित होगा। उस समय सभी जीवों को मेरे परमपद अर्थात् सतलोक का ज्ञान होगा और सभी भक्ति करके सतलोक जायेंगे। (ख) आदरणीय दादू साहेब जी (अमृत वाणी में प्रमाण) कबीर भगवान के साक्षी - आदरणीय दादू साहेब जी जब सात वर्ष के बालक थे तब पूर्ण परमात्मा जिंदा महात्मा के रूप में मिले और सत्यलोक ले गए। तीन दिन तक दादू जी बेहोश रहे। होश में आने के पश्चाताप। भगवान की महिमा की आँखों ने देखा-सी अरवानीवाणी अप की:

जिन मोकुँ निजी नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार। दादू दूसरा नहीं नहीं, कबीर सृजन हार ।।

दादू नाम कबीर की, जै कोई लेवे ओट। उन्हें कबहुगे नहीं, काल बज्र के निशान ।।

दादू नाम कबीर का, सुनकर कांपे काल। नाम भरोसे जो नर चले, होवे न बंका बाल ।।

जो जो शरण कबीर के, तरग अनन्त अपार। दादू गुण कीता कहे, कहत न आवै पार ।।

कबीर कर्ता आप है, दूजा नाहिं सी। दादू पूरन जगत को, भक्ति दृढावत सोय ।।

ठेका पूरन होय ​​कब, सब कोई तजै शरीर। दादू काल गँजे नहीं, जप जो नाम कबीर ।।

आदमी की उम्र घटाई, तब यम घेरे आय। सुमिरन किया कबीर का, दादू लिया बचाय ।।

मेटि दिया अपराध सब, आय मिले छनमाँह। दादू संग ले चले, कबीर चरण की छांह ।।

सेवक देव निजी चरण का, दादू अपना जान। भृंगी सत्य कबीर ने, कीन्हा तुम समान ।।

दादू अन्तरगत सदा, छीन-छिन सुमिरन ध्यान। वरु नाम कबीर पर, पल-पल मेरा प्रान ।।

सुन -2 साही कबीर की, काल नववि माथ। धन्य-धन्य हो तिन लोक में, दादू चरण हाथ ।।

केहरि नाम कबीर का, आम काल गज राज। दादू भजन प्रतापते, भागे सुनत आवाज ।।

पल एक नाम कबीर का, दादू मनचित लाय। हस्ती के अनवरत को, श्वान काल नहीं खाय ।।

सुमरत नाम कबीर का, कटे काल की पीर। दादू दिन दिन ऊँचे, परमानन्द सुख सीर ।।

दादू नाम कबीर की, जो कोई लेवे ओट। तिनको कबहुँ ना लगाइ, काल बज्र की निशानियाँ ।।

और संत सब कूप हैं, केते झृता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर ।।

अबही तेरी सब मिटाई, जन्म मरन की पीर। स्वांस उस्वांस सुमिरले, दादू नाम कबीर ।।

कोई सर्गुन में रीझ रहा, कोई निर्गुण ठहरे। दादू गति कबीर की, मोते कही न जाय ।।

जिन मोकुँ निजी नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार। दादू दूसरा नहीं नहीं, कबीर सृजन हार ।। जय हो बन्दी छोड़ की।

सत् साहिब जी बन्दीछोड़ सदगुरु रामपाल जी महाराज की जय हो .....!

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