Rakshabandhan : 2020
रक्षाबंधन का त्योहार
रक्षाबंधन
रक्षाबंधन हिन्दू धर्म का एक मुख्य त्योहार है। यह श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र लाती है जिसका उद्देश्य होता है कि भाई विपत्ति में बहन की रक्षा करे। इस त्योहार का प्रचलन प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। इस दिन प्रत्येक हिन्दू धर्म के लोग घर मे अच्छे अच्छे पकवान बनाते हैं। यह त्योहार जेन धर्म मे भी मनाया जाता है।
रक्षाबंधन का ऐतिहासिक कारण
मेवाड़ की रानी कर्मावती राणा सांगा की पत्नी थी वह मेवाड़ की राज माता थी। रानी को पता चला कि गुजरात के बहादुर शाह मेवाड़ पर हमला करेगा तथा इस युद्ध के लिए हुमायूं की सहायता जरूरी है तब रानी ने हुमायूं से सहायता के लिए रक्षा सूत्र भेजा। मुगल बादशाह हुमायूं ने सहायता के लिए सेना तैयार किया और मेवाड़ की सहायता की तथा विजय हुए।
इस कारण भी रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया।
रक्षाबंधन मनाने के धार्मिक कारण
राजा बलि दानवीर के नाम से प्रसिद्ध है । जब वह 100वा यज्ञ कर रहा था तब देवराज इंद्र चिंतित हुआ। इंद्र ने विष्णु जी से सहायता मांगी तो विष्णु जी बामन रूप बनाकर यज्ञ स्थल पर आए तथा तीन पग धरती दान में मांगी। बलि ने दान दे दी। बामन रूप में भगवान ने दो कदम धरती व तीसरा कदम बलि के सिर पर रख दिया जिससे वह पाताल लोक का राज्य मिला । लेकिन बलि ने एक वरदान मांगा की आप हमेशा मेरे सामने रहोगे। लक्ष्मी जी बहुत चिंतित हुई। लक्ष्मी जी ने राजा बलि को एक रक्षा सूत्र बांधी। वरदान में विष्णु जी को मांग लिया। बलि ने स्वीकार किया। इस दिन को रक्षाबंधन मनाया जाने लगा।
रक्षाबंधन से बहन की रक्षा होगी ?
बचपन से पढ़ते व सुनते आए हैं कि भाई बहन की रक्षा के लिए रक्षाबंधन मनाया जाता है लेकिन क्या एक भाई बहन की रक्षा कर पाता है?
हमारे सभी शास्त्रो में प्रमाण मिलता है कि इंसान जैसे कर्म करेगा फल वैसा ही मिलेगा। फिर बहन के भाग्य में भाई कैसे परिवर्तन कर सकता है।
वर्तमान में परिस्तिथि विपरीत है क्योंकि आजकल बहन बेटियों पर कितना जुल्म हो रहा है। जिस दिन दूसरे की बहन बेटी को अपनी बहन बेटी समझने लग जाएंगे तब रक्षाबंधन की जरूरत नही होगी।
जिस बहन के भाई नही है वह क्या करेगी।
जिस बहन के कोई भाई नही है वह बहन रक्षाबंधन के दिन किसे राखी बाधेगी। उस बहन को कितना दुख होगा।
वास्तव में कौन है रक्षा करने वाला?
रक्षाबंधन एक मनोरंजन या मेल मिलाप वाला दिन कह सकते हैं मगर भाई द्वारा बहन की रक्षा का इससे कोई प्रयोजन नही है। क्योंकि रक्षा केवल परमेश्वर कर सकता है।
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उदाहरण :- द्रोपदी का चिर हरण हो रहा था तब संसार के कोई भी मानव जाति रक्षा नही कर सकी। जबकी वहां सभी महारथी मौजूद थे। अंत मे परमेश्वर को याद किया तब उसकी रक्षा हुई। वास्तव में परमेश्वर ही हम सभी का रक्षक है। उनसे रक्षा तभी हो सकती है जब हम पूर्ण सन्त की शरण लेकर भक्ति करेंगे। परमेश्वर से लाभ प्राप्त करने के लिए सतगुरु की शरण आवश्यक है।
वर्तमान में आध्यात्मिक परम् सन्त की जानकारी
वर्तमान में सतगुरु का पाना सम्पूर्ण मानवजाति के लिए वरदान है। इस कलयुग में धरती पर परम् सन्त रामपाल जी महाराज है वे सही भक्ति बताकर समाज का कल्याण कर रहे हैं। सन्त रामपाल जी महाराज जी ने सभी धर्मग्रंथों से एक परमेश्वर की भक्ति विधि बताई है। सन्त रामपाल जी महाराज से दीक्षा लेकर परमात्मा से मिलने वाला लाभ प्राप्त करे। सन्त जी अपने प्रवचनों में कहते हैं कि जो मानव एक बार कबीर परमेश्वर की भक्ति करने लगा जाता है तो वह मोक्ष पाने का अधिकार बन जाता है। सभी भविष्यवक्ताओं की भविष्यवाणी के अनुसार सन्त रामपाल जी महाराज भारत को विश्वगुरू बनाएंगे। सन्त रामपाल जी महाराज का उद्देश्य है मानव जाति को सनातन परम् धाम की प्राप्ति करवाना।
हम सभी की रक्षा केवल पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी कर सकते हैं। इंसान स्वम अपनी रक्षा भी नही कर सकता किसी ओर की कैसे कर सकता है। कई बार अखबारों में सुनने को आता है कि रक्षाबन्दन के दिन भाई की लाश आती है। पूरा परिवार बिलख रहा होता है। इसलिए पूर्ण परमात्मा की ओट अवश्य लेनी चाहिए ताकि आपत्तिजनक स्तिथि में रक्षा हो सके।
अधिक जानकारी के लिए सम्पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान अवश्य ग्रहण करे।
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