बॉलीवुड कितना ठीक है?
बॉलीवुड भारतीय सिनेमा का ही नाम है इसका मुख्य केंद्र मुम्बई में है। लोगो का मनोरंजन करना इसका उद्देश्य है। आधुनिक युग मे कोई भी इंसान बॉलीवुड की फिल्मों से अछूता नही रहा। युवा वर्ग फिल्मों के अनुरूप ही अपने आप को ढालता जा रहा है।बॉलीवुड से समाज मे फैली अश्लीलता
भारतीय सिनेमा पश्चिम सभ्यता की देन है। यह समाज मे अश्लीलता फैलाने का कार्य अप्रत्यक्ष रूप से कर रहा है। बॉलीवुड जितना जनता का मनोरंजन कर रहा है उससे अधिक अश्लीलता को बढ़ावा दे रहा है। वर्तमान में बॉलीवुड की फिल्मों में अश्लीलता चरम पर हैं। बॉलीवुड फिल्म भारतीय संस्कृति को तार तार कर रही है लेकिन समाज फिर भी बॉलीवुड का आदि हो गया है।
बॉलीवुड एक्टर्स का किरदार।
भारतीय सिनेमा में जितने भी अदाकार (हीरो, हीरोइन) है उनका कार्य केवल धन कमाना है मानव की भलाई का कोई उद्देश्य नही है। क्योंकि अगर मानव भलाई का काम होता तो अश्लील फिल्में नही बनाकर समाज को जागृत करने के लिए सामाजिक व्यवस्था को सुधारने का प्रयास करते। फिल्मों में जिस तरह एक्टर्स अदाकारी करते हैं उन एक्टर्स की वास्तविक जिंदगी कुछ अलग होती है। कुल मिलाकर बॉलीवुड समाज में अश्लीलता को बढ़ावा दे रहा है तथा इंसान की आध्यात्मिक प्रवर्ति को कम कर रहा है।
फिल्मी गाने में अभद्र चित्रण।
बॉलीवुड की सभी फिल्मों में अक्षर एक्टर्स अभद्र तरीके से नाच गान करते हैं यह हमारी युवा पीढ़ी को आकर्षित करते हैं तथा अधिक धन कमाने के लिए अभद्र चित्रण करते हैं। इसका समाजिक जीवन मे बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। बॉलीवुड के गाने का सुमार युवा वर्ग पर इस कदर सवार है कि भारतीय सभ्यता भी भूल जाते हैं।
आध्यात्मिक ज्ञान से समाज सुधार।
बॉलीवुड ने समाज को अश्लीलता की तरफ धकेल दिया है जिसका खामयाजा भुगत रहा है। इस आपराधिक दुनिया से बचने के लिए बॉलीवुड को हमेसा भूलना होगा। इसका साधारण सा एक ही उपाय है आध्यात्मिक ज्ञान। ज्ञान से हम भले व बुरे का ज्ञान होगा तथा इससे बचा जा सकेगा।युवा वर्ग भगवान व भक्ति से काफी दूर हो गया है, जरूरत है परम् सन्त की जो हमे सतमार्ग पर ले जा सके। वर्तमान की बिगड़ी युवा पीढ़ी के बावजूद भी एक ऐसा समाज तैयार हुआ है जो इस मनोरंजन की दुनिया से काफी दूर रहता है। वह है सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा तैयार भक्त समाज। जिसमे किसी भी तरह की बुराई नही है। सन्त रामपाल जी महाराज जी ने नाम दीक्षा लेने के लिए आवश्यक नियम बनाये हुए हैं। उनसे नाम दीक्षा लेने के लिए व्यक्ति को आजीवन उन नियमो का पालन अंतिम स्वास तक किया जाता है। उनके नियम है कि वे किसी भी तरह की फ़िल्म, सीरियल, कॉमेडी, व गेम को अपनी जिंदगी में जगह नही देते। सन्त रामपाल जी महाराज के भक्त समाज को एक स्वच्छ समाज कहा जा सकता है।



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