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The attempt to kill Kabir Saheb ji


शेखतकी दिल्ली के राजा सिकन्दर लोधी का धार्मिक गुरु था  और सिकन्दर कबीर साहेब जी का शिष्य बन गया जिससे शेखतकी  उनसे ईर्ष्या करता था। शेखतकी ने कई योजना बनाकर  उनको मारना चाहता था । 
 ● शेखतकी ने कहा कि सब उपस्थित जनता कबीर को पत्थर मार-मारकर मार डालो। ऐसा ही किया गया। फिर तीर चलाने वाले सैनिकों से कहा कि तीर मार-मारकर कबीर की हत्या कर दो।परंतु परमेश्वर कबीर जी की ओर न तो पत्थर आया, न तीर। शेखतकी कबीर जी को मारने काअवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। शेखतकी ने कहा कि तोप मँगाओ। उससे गोले मारकरकाम-तमाम कर दो। ऐसा ही किया गया। तोप यंत्रा से गोले चलाए गए, परंतु कबीर परमेश्वर के
आसपास एक भी नहीं गया। कोई तो वहीं किनारे पर जाकर गंगा जल में गिर जाए। कई दूसरे किनारे पर जाकर गंगा किनारे शांत हो जाऐं। कोई कुछ दूर तालाब में जाकर गिरे। परंतु परमेश्वर के निकट एक भी न जाए। इस प्रकार चार पहर यानी 12 घण्टे तक यह जुल्म शेखतकी करता रहा। जनता का विवेक धर्मगुरूओं ने हर रखा था।
● परमेश्वर कबीर जी ने दया करी। जल के अंदर समा गए। शेखतकी खुशी से नाचने लगा कि डूब गया दुश्मन। अब शव पर गारा (रेग) तथा रेत चढ़ जाएगी। मिट्टी में दफन हो जाएगा।
● परमेश्वर कबीर जी अंतर्ध्यान होकर रविदास जी की कुटिया पर गए और दोनों परमात्मा की महिमा के शब्द गाने लगे। शेखतकी ने अपने साथियों से कहा कि चलो  रविदास से बताते हैं कि आपका अविनाशी परमात्मा गंगा के जल में डूबकर मर गया है।
 ●  शेखतकी ने रविदासजी जी की कुटिया के बाहर जाकर कहने लगा कि कहाँ गया आपका भगवान कबीर जी?  कुवे में डुबोकर मार दिए हैं।

◆रविदासजी जी कहने लगे कि किसकी बात कर रहे हो पीर जी कबीर साहेब जी तो ये बैठे। 
◆ शेखतकी ये देखकर सिर झुकाकर वापस सिकन्दर लोधी के पास आकर कहा कि राजन कबीर जी तो किसी भी प्रकार नही मर रहा है। 


कबीर साहेब कैसे मरते वो तो अविनाशी परमेश्वर है । सृरी सृष्टी के सृजनहार है । 

वर्तमान में कबीर साहेब जी के अवतार सन्त रामपाल जी महाराज है । आज वही कबीर साहेब जी का सच्चा ज्ञान  बता रहे हैं तथा गलत ज्ञान को मिटाकर एक सच्चा ज्ञान बता रहे हैं।  सन्त रामपाल जी महाराज जी के मंगल प्रवचन देखने के लिए देखे साधना Tv शाम 7 pm से
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