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Social Rites Fall & Upliftment

 संस्कारो का बदलता स्वरूप 

🔺 वर्तमान समय में जन साधारण संस्कारों के सामाजिक और धार्मिक महत्व को भूल गए। संस्कार एक परम्परा मात्र रह गए। उनमें गतिशीलता न रही। समाज की बदलती हुई परिस्थितियों के अनुसार उनमें परिवर्तन नहीं किए गए। उनमें मानव को सुसंस्कृत बनाने की शक्ति न रही। वे नित्य चर्या से संबंधित धार्मिक- कृत्य मात्र रह गए। उनका जीवन पर प्रभाव लेशमात्र भी न रहा। 
अब वैज्ञानिक प्रगति के कारण जीवन की कल्पना ही बदल गई हैं । अतः मनुष्य अब भी संस्कारों के द्वारा अपने जीवन को पवित्र करना चाहता है। मनुष्य अब भी यह भली- भांति जानता है कि जीवन एक कला है। उसको सफल बनाने के लिए जीवन को पूर्व संस्कारो के अनुसार चलने  की आवश्यकता है। व्यक्ति के सुसंस्कृत होने पर ही समाज सुसज्जित  हो सकता है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वर्तमान काल में भी संस्कारों का अपना अलग महत्व है। संस्कारों का रुप बदल सकता है, किंतु जीवन को सफल बनाने की दिशा में उनका महत्व कम नहीं हो सकता । 
  🔺संस्कारो के पतन कारण

भारतीय संस्कृति में  यहां के संस्कार बहुत ही  महत्वपूर्ण है   लेकिन समय के साथ साथ ही उनका पतन हो रहा है ।    इसके बहुत कारण है ।  

 🔹   पश्चिम सभ्यता को अपनाना । 
      हमारा समाज आज पश्चिमी सभ्यता को अपना रहा है जो कि समाज के लिए जहर से कम नही है । बड़ो की नजर में कोई लाज शर्म नही रखना व असभ्य वस्त्र पहनना , यह संस्कारो के पतन होने का भी मुख्य कारण है। 

🔹  अश्लील धारावाहिक व फ़िल्म
   वर्तमान समाज लगभग दो दसको में फ़िल्म व धारावाहिक का tv चैनल पर आना समाज के लिए बहुत घातक साबित हो रहा है।  अश्लील फिल्में देखकर लोग अपने संस्कारो को भूलते जा रहे हैं ।   आज एक पिता भी अपनी बेटी के साथ लाउडस्पीकर पर नाच गान कर रहा है इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है । इसका कारण बॉलीवुड फिल्म व अश्लील धारावाहिक है। फ़िल्म देखना मतलब सुसज्जित समाज मे जहर घोलने जैसा है। 

🔹 परिधान 
     आधुनिकता के दौर में हमारे समाज में खान पीन से लेकर पहनावे तक  बदल गए हैं।  
आज से 25 वर्ष पहले अपनी लाज शर्म को ध्यान में रखते हुए कपडे पहनते थे जो सभ्य थे तथा अपनी संस्कृति व संस्कारो को  ध्यान में रखते हुए पहनते थे। परन्तु आज स्तिथि उलट गई है । लड़के हो या लड़की  सभी  अपनी मनमर्जी से कपड़े पहनते हैं ।  शहरी क्षेत्र की तो बात ही अलग है वहाँ संस्कारो का कोई मोल नही रहा ।  निर्लज्जता की कोई सीमा नही रही। 

  🔺संस्थाओं द्वारा संस्कृति व संस्कारो के बचाने के उपाय.

हमारे देश मे धार्मिक संस्क्रति  व संस्कारो को यथावत रूप में लाने के कई उपाय कर रहे हैं ।  जैसे छोटे बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाने के लिए महापुरुषों की जीवनी व उनके कार्यो , व्यवहार को स्कूली  शिक्षाओं में जोड़ना ।   समाज मे बड़े बूढे लोगो को सम्मान देने के लिए भी सरकार कई योजनाएं चलाती है ।   अनेक उपाय होने के बाद भी संस्कारो के पतन पर कोई प्रभाव नही पड़ रहा । 

 🔺 संस्कारो का वापस पुनर्जीवित 

 बढ़ती अधुनिकता में भी आज एक विशाल संगठन ने समाजक संस्कारो को पुनर्जीवित किया है । जी हाँ।
 यहाँ बात हो रही है सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा एक स्वछ समाज का निर्माण हो रहा है ।  सन्त रामपाल जी महाराज जी ने देश दुनिया को एक  संदेश दिया है कि हम कितने भी बदल जाये मगर सच्चे ज्ञान से हम वापस उसी दौर में जा सकते हैं जहां  समाज मे पूर्ण शांति , व संस्कारयुक्त हैं। सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा तैयार भक्त समाज  किसी प्रकार का रागद्वेष नही रखता तथा बड़े बूढ़े का पूर्ण सम्मान होता हैं ।   उनके अनुयायी साधरण वेशभूषा पहनते हैं जो एक सभ्य समाज के लिए होती है । उनके अनुयायी कोई भी फ़िल्म , धारावाहिक नही देखते । किसी प्रकार का नशा नही करते। किसी भी व्यक्ति को अप्रिय  भाषा नही बोलते ।  सन्त रामपाल जी महाराज ने बदलते दौर को फिर धार्मिक व संस्कार युक्त  बना दिए हैं ।   उनका भक्त समाज एक ही सिद्धान्त पर चलता है ,  कबीर आप ठगाए सुख होत है और ठगे दुख होई  ।।
 यानी हम दुख सहन कर सकते हैं लेकिन किसी को दुख नही दे सकते । 

🔺 सन्त रामपाल जी महाराज इस समय एक मात्र सन्त हैं जो समाज के बिगड़ते रूप को फिर नवनिर्मित कर रहे हैं।    उन्होंने समाज सुधार के लिए एक बहुमूल्य पुस्तक लिखी है जिसका नाम जीने की राह है । 

यह पुस्तक समाज सुधार के लिए मिल का पत्थर साबित हो रही है।  सन्त रामपाल जी महाराज जी ने से वर्णव्यवस्था को भी समाप्त कर रहे हैं तथा समाज मे नशा , चोरी , ठगी , बलात्कार , भूर्ण हत्या आदि को सतज्ञान से समाप्त किये हैं। समाज मे उनके अनुयायियों की अलग ही पहचान बन गई है।  इस अतुलनीय समाज सुधार पहले किसी ने नही किया और न कर सकेंगे।  उनका ज्ञान समझने के लिए तथा समाज सुधार में किस तरह योगदान है इसके लिए देखे साधना चेनल शाम 7:30 से ओर आप भी एक सभ्य नागरिक होने का फर्ज निभाये। 





 
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