शिक्षा जीवन का महत्वपूर्ण विषय है ।
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school शिक्षा के बिना इंसान अधूरा ही समझा जाता है। लेकिन अभी वर्तमान की शिक्षा प्रणालीकुछ सही नही है ।समय के हिसाब से इसका नवीनीकरण होना अनिवार्य है।
देश किस स्तिथि में है यह जानकारी हम प्राथमिक शिक्षा से मूल्यांकन कर सकते हैं। वर्तमान में सरकारी प्राथमिक शिक्षा का स्तर बिल्कुल नीचे पँहुच चुका है ।
🔹गिरती शिक्षा पद्दति का कारण
वर्तमान की शिक्षा प्रणाली भर्स्ट लोगो के कारण गिरती जा रही है । जिसकी सुध सरकार नही ले रही। सरकारी स्कूलों की दयनीय स्तिथि बनी हुई है। हर क्षेत्र में प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है , इसका कारण है सरकारी school शिक्षाओं का गिरता स्तर। सरकार ने शिक्षा तो सब के लिए अनिवार्य कर दी लेकिन उसकी पालना सही नही कर रही। अच्छी कमाई करने वाले लोग भी अपनी संतान को प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं क्योंकि सरकारी शिक्षा केवल दिखावे के लिए रह गई है। यही कारण है हमारी शिक्षा प्रणाली धीरे धीरे गिरती जा रही है। प्राइवेट स्कूल में अंग्रेजी माध्यम की स्कूल में गरीब तबके के बच्चे नही पढ़ पाते हैं यह भेदभाव हमारी शिक्षा प्रणाली में है इससे समाज मे गरीबो को यथोचित शिक्षाओं का अभाव रहता है। सरकारी शिक्षा निःशुल्क होने के बाद भी छात्र प्राइवेट स्कूल में पढ़ना बेहतर समझते हैं जबकि अच्छी डिग्री वाले टीचर सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हैं। इसके बावजूद भी परिणाम प्राइवेट की तुलना में आशाजनक नही रहते।
🔹सुधार कैसे हो
हमारी शिक्षा पद्दति में शिक्षा के साथ साथ संस्कारो का समावेश करना अति आवश्यक है। सरकार द्वारा सुनिशित हो कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में कोई कमी न आये। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में छूट देकर कोई समझौता न करे । शिक्षकों द्वारा दी जा रही शिक्षा का मुल्यांकल समय समय और होता रहे।
🔹संस्कार युक्त शिक्षा का बढ़ता रूप
हमारा देश प्राचीन काल से ही शिक्षा (school )का केंद्र रहा है और यहां पर साधु सन्तो का अधिक रहना बहुत ही प्रेरणादायक रहा है। लेकिन समय के साथ साथ संस्कार व अच्छी शिक्षा बदलती गई। अब फिर वर्तमान में छोटे से लेकर बड़ो तक सुधार हो रहा है।
बात कर रहे है सन्त रामपाल जी महाराज जी की जिन्होंने भारत मे गिरते समाज को बचाने के लिए एक मिसाल पेश की। आज सन्त रामपाल जी महाराज दुनिया के सबसे बड़े समाज सुधारक है । उनकी दी हुई शिक्षा से समाज मे एकता व भाईचारा दिखाई देता है। देश की गलत रूढ़िवादी परम्परा से हटकर उन्होंने समाज को गति दी है जिसमे पाखण्डवाद , जातिवाद , छुआछूत जैसी परम्पराए धूमिल हो रही है ,तथा समाज मे एक नया निखार आ रहा है। सन्त रामपाल जी महाराज कबीर साहेब जी की प्रणाली को आगे बढ़ाकर उनकी बताई विधि व उनकी भक्ति से समाज मे अद्वितीय सुधार हुआ है। सन्त रामपाल जी महाराज जी से दीक्षा लेने के बाद प्रत्येक व्यक्ति कोई नशा नही करता , कोई भस्टाचार में लिप्त नही रहता , चोरी जारी, ठगी , व अनेक प्रकार की बुराई से कोसो दूर रहते हैं। वास्तव में अगर सरकार उनके विचारों को सुने व माने तो आज भारत फिर से सोने की चिड़िया बनने से नही चुकेगा। सन्त रामपाल जी महाराज वास्तव में सच्चे शिक्षक भी है । उनकी प्रेरणा पाकर हर व्यक्ति अपने आप को धन्य समझता है ।
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