Dowry kill over community
dowry giving is crime
आधुनिक दहेज प्रथा मूलत: धनी लोगों की देन है, जिसकी चक्की में निर्धन भी पिस रहे हैं । इस प्रथा के पीछे लाभ की दुष्प्रवृत्ति छिपी हुई है । आज दहेज प्रथा भारत के सभी क्षेत्रों और वर्गों में व्याप्त है । इस कुप्रथा ने लड़कियों के पिता का जीवन दूभर कर दिया है । लड़के के पिता अपने लड़के का कथित सौदा करने लगे हैं । यह घोर नीतिक पतन नहीं तो और क्या है? इस कुप्रथा के चलते कितने लड़की वाले बेघर एवं बर्बाद हो रहे हैं । कितनी ही विवश कन्याओं को आत्महत्या जैसा कुकर्म करना पड़ रहा है । कितनी वधुएं दहेज की खातिर जीवित जला कर मारी जा रही हैं ।
यही नही शादी होने के बाद भी बहु के पिता ने दहेज नही दिया तो जीवन भर ससुराल वाले परेशान करते हैं जिसके चलते की बेटियां आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाती है।
दहेज प्रथा की सुरुआत
दहेज प्रथा की सुरुआत का एक कारण है इसकी शुरुआत प्राचीन काल से ही हुई है । पहले कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में शादी विवाह होते थे तो एक गांव से दूसरे गांव की दूरी बहुत ज्यादा होती थी तथा लूट पाट चोरी डकैती जैसे कार्य बहुत ही ज्यादा होते थे । जब भी किसी की शादी होती थी उसके बाद जंगल से होकर गुजरते थे तो कुछ ल डकैत मिलकर दुल्हन के गहनों को लूट लिया करते थे । इससे कुछ समझदार व्यक्तियों ने एक योजना बनाई की गावो के ज्यादा लोगो को दूल्हा दुल्हन के साथ लाया जाए । साथ मे। चलने वालों को एक बर्तन व कुछ पैसे दे दिए जाते थे जिससे लोग लोभ में आकर ज्यादा लोग साथ आने जाने लगे । ऐसे करते करते एक प्रथा हो गई। यही कारण के चलते दहेज प्रथा आज एक बहुत भयंकर रूप ले चुकी है जिस को मिटाना बहुत मुश्किल हो गया है इसी से ही भारत में बेरोजगारी व गरीबी के हालात बन चुके हैं यह केवल दहेज प्रथा की ही देन है । अब वर्तमान समय में दहेज प्रथा का कोई रोल नहीं है दहेज प्रथा गरीबी का मुख्य कारण है।
आजकल तो दहेज प्रथा का ज्यादा ही चलन हो गया है , दूल्हा शादी के समय दहेज की मांग करता है जो घोर अन्याय है एक बेटी के पिता का ।
बेटी के पिता को मजबूर होकर दहेज देना पड़ता है।
यह हमारी मानसिकता कितनी बदल गई है । हम अच्छे और बुरे में तनिक मात्र भी शंका नही कर पाते हैं ।
हम अभी भी पारम्परिक रिवाज में रंगे हुए हैं जिसका दुष्परिणाम हमे भुगतना पड़ रहा है , आखिर कब खत्म होगी यह कुप्रथा ?
चलिए आप को बता दे कि वर्तमान में जगतगुरु सन्त रामपाल जी महाराज जी ने इस प्रथा को खत्म करने के लिए शास्त्रो में प्रमाणित करके ज्ञान बताते हैं कि यह प्रथा कलयुग में सुरु हुई है ।
इस प्रथा हो गया समझकर ही समाप्त कर सकते हैं । क्योंकि बिना ज्ञान के इंसान बिना नाथ का बेल है। यानी इंसान की की मर्यादा नही रही इस कुरीति को भी ज्ञान से ही समाप्त कर सकते हैं।
दहेज प्रथा के दुष्परिणाम
आज 21 वीं सदी में दहेज प्रथा एक बहुत ही क्रूर रूप ले चुका है। एसा भी होता है, अगर विवाह के समय दहेज में कमी हुई तो कुछ लोग तो शादी किए बिना ही बारात वापस ले जाते हैं। अगर गलती से शादी हो भी जाती है तो लड़की का जीवन नरक सामान बीतता है या फिर लड़कियों को कुछ गलत बहानों से तलाक दे दिया जाता है। बात तो यहां तक भी बिगड़ चुकी है की कुछ लड़कियों से तलाक ना मिलने पर ससुराल वाले उन्हें जलाकर मार चुके हैं। आज दहेज प्रथा कैंसर की तरह समाज को नष्ट करते चले जा रहा हैं।
अगर ऐसे ही यह प्रथा चलती रही तो एक दिन ऐसा आ सकता है कि समाज मे लड़कियों की बहुत कमी हो सकती है।
सरकार द्वारा निरर्थक प्रयास
सरकार भी दहेज प्रथा को रोकने के लिए कई प्रकार के नियम बना रही है परंतु दहेज प्रथा कुछ इस तरीके से पूरे देश में फैल चुका है कि अब इसे रोकना कोई आसान काम नहीं है। सरकार ने लड़कियों के लिए सुकन्या सम्रद्धि जैसी योजनाएं भी शुरु की है। आज लड़कियां लड़कों के साथ कंधा मिलाकर देश के हर एक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पता नहीं फिर भी लोगों के समझ में क्यों नहीं आ रहा है कि लड़का-लड़की एक समान।
सन्त रामपाल जी महाराज जी द्वारा दहेज प्रथा को खत्म के लिए प्रयास
सन 2014 के बाद हजारो दहेज रहित शादिया हुई है सन्त रामपाल जी महाराज जी के शिष्यो की। यह एक मिशाल है ।
शादी कैसे करनी चाहिए जिससे दूल्हे दुल्हनके जीवन कोई परेशानी न आये । दहेज प्रथा भारत मे सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ने का काम कर रही हैं । दूसरी तरफ सन्त रामपाल जी महाराज जी देश को दहेज मुक्त भारत बनाने के लिए प्रयासरत हैMore details click here
भारत मे हजारो शादियां इस तरह हो रही है । यह सिर्प सन्त रामपाल जी महाराज जी की देन है उनकी उनके द्वारा उनके द्वारा लिखी गंगा पुस्तक pdf ओर जीने की राह पुस्तक जरूर पढ़ें ।
🔹दहेज समाज मे एक ऐसा विकार बन गया है जिससे देखा देखी में लोग गरीब और गरीब होते जा रहे हैं ।
🔺 कारण यह है कि कोई भी व्यक्ति अपनी बेटी व बेटे की शादी में अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं केवल दिखावे कर लिए ।
🔹 सन्त रामपाल जी महाराज जी ने सतभक्ति के साथ साथ दहेज प्रथा, नशा, ठगी, भरस्टाचार जैसी समाज नाशक बुराई को समाप्त कर रहे हैं ।
दहेज प्रथा के कारण आज एक बेटी का पिता उसकी शादी का जुगाड़ करने में कई वर्षो की कमाई को एक ही दिन में फूंक देता है और जीवन भर उस कर्ज के नीचे दबा रहता है। यह दहेज प्रथा का ही दुष्परिणाम है ।
सन्त रामपाल जी महाराज जी सत्संगों में बताते हैं कि दहेज देने वाला व लेने वाला दोनों पाप के भागी होते हैं।
आज संसार मे सन्त रामपाल जी महाराज जी के शिष्यो के अलावा कोई ऐसा समाज नही है जहाँ पर ऐसी बुराई नही है। सरकार ने दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए बहुत कदम उठाए लेकिन उसका कोई फायदा नही हुआ।
विवाह कैसे करे
सन्त रामपाल जी महाराज जी ने अपने सभी अनुयाइयों को दहेज न लेने देने का संकल्प दिलाते हैं उसके बाद ही शिष्य बनते हैं।
अगर ऐसे ही सभी लोग सन्त रामपाल जी महाराज जी से दीक्षा लेकर भक्ति करते हैं तो सारा समाज सभी प्रकार कि कुप्रथाओ से अपने आप ही निजात मिल जाती है।
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