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आध्यात्मिक गुरु की आवश्यकता



आध्यात्मिक गुरु की आवश्यकता

हमारे जीवन मे गुरु की आवश्यकता बेहद जरूरी है। हमे अच्छा जीवन जीने के साथ साथ परमेश्वर की प्राप्ति के लिए परमात्म ज्ञान की जरूरत होती है। वह पूर्ति आध्यात्मिक गुरु ही करता है। आध्यात्मिक गुरु परमात्मा प्राप्ति के लिए मार्गदर्शक होते है तथा  गुरु परमेश्वर के तुल्य होते हैं। गुरु हमे बुराई को त्यागने व अच्छे कर्म करवाने के लिए प्रेरित करते हैं।
जीवनकाल में गुरु बनाना बहुत महत्वपूर्ण  है। परमेश्वर प्राप्ति के लिए बीच की कड़ी सतगुरु होता है। पूर्ण सतगुरु मनुष्य का मार्गदर्शक है, सच्चे गुरु की पहचान करें।


गुरु ही सत्य और असत्य का ज्ञान कराता है



गुरु, आत्म और परमात्म के बारे में ज्ञान बताते हैं तथा गुरु की आवश्यकता क्यों है? यह भी गुरु ही समझाते हैं।  गुरु हमे यह भी बताते हैं कि परमात्मा कौन है , कैसा है, कहाँ रहता है, तथा उनको प्राप्त करने की क्या विधि है, भक्ति का क्या उद्देश्य है। यह पूर्ण जानकारी केवल सतगुरु ही बता सकते हैं।
विष्णु जी के अवतार रामचंद्र जी ने वसिष्ठ जी व कृष्ण जी दुर्वसा जी को आध्यात्मिक गुरु बनाये । यह परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है।  इसलिए आम इंसान को भी गुरु बनाना अत्यंत आवश्यक है।

 सात समुद्र की मसी करू लेखनी करू बनराय।
 धरती का कागद करू गुरु गुण लिखा न जाय। ।

कबीर साहेब जी ने गुरु के गुणों के बारे में बताया है कि- सातों समुद्र की स्याही बना ले और धरती जितना बड़ा कागज बना ले उस पर गुरु के गुणों को लिखा जाए तो भी कम है। यानी गुरु में अपार गुण होते हैं। जितनी महिमा सुनाए उतनी ही कम है। 
गुरु की आवश्यकता हमारे जीवन मे बेहद जरूरी है। हमारे सभी सद्ग्रन्थों में गुरु की महिमा लिखी हुई है तथा उनके गुणों का बखान किया गया है। मनुष्य जीवन का उद्धार करने के लिए गुरु की परम् आवश्यकता है। गुरु बिना मनुष्य परमात्मा प्राप्ति नही कर सकता तथा अपनी सुख प्राप्ति की  इच्छा भी गुरु ही पूर्ण करता है। कोई भी सन्त या महापुरुष गुरु के बिना नही बनते। आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं वे सभी गुरु कृपा से ही उनका नाम हुआ है तथा युग युगान्तर तक उनकी महिमा बताई जाती है। गुरु के बिना मोक्ष का मार्ग किसी को भी नही मिल सकता है।  
  एक शिष्य को गुरु सत्य के मार्ग पर ले जाता है चाहे वह पूर्व में कैसे ही आचरण वाला हो।  इस संसार मे 84 लाख प्रकार की योनिया बनाई गई है जो चींटी से लेकर हाथी तक है। एक जीवात्मा इन 84 लाख प्रकार की योनियों को अपने कर्म आधार पर भोगती है। इसके चक्र से वही बच सकता है  जिसने सतगुरु से नाम दीक्षा लेकर भक्ति की है।  


         शास्त्रो में गुरु का महत्व 

 गुरु यानी तत्वदर्शी सन्त की शरण मे जाने के लिए पवित्र गीता जी को बोलने वाला ब्रह्म/काल भगवान अर्जुन को बताया है कि परम् सुख पाना चाहता है तो तत्वदर्शी सन्त की शरण मे जा , उनको भलीभांति दण्डवत प्रणाम करना तथा कपट छोड़कर सरलतापूर्वक प्रश्न करना जिससे वे तुम्हे परमात्म तत्व का उपदेश करेंगे। यानी परमात्मा प्राप्ति का मार्ग बताएंगे। 

अब आपको समझ मे आ गया होगा कि गुरु बनाना जरूरी है।
गुरु की आवश्यकता | गसच्ची भक्ति का महत्व गुरु बनाना बहुत महत्वपूर्ण  है। परमेश्वर प्राप्ति के लिए बीच की कड़ी सतगुरु होता है। पूर्ण सतगुरु मनुष्य का मार्गदर्शक है,

 शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी बड़ा बताया है। जैसे कबीर साहेब जी ने कहा है , 
गुरु गोविंद दोनों खड़े किसके लागू पाय। 
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो मिलाय।।

इसका भावार्थ है कि, गुरु और भगवान एक साथ खड़े हो तो सबसे पहले गुरु के चरण छुये, उसके बाद भगवान के। क्योकि गुरु की कृपा से ही भगवान मिला है।

कबीर साहेब जी ने अपनी वाणी में कहा है कि-
गुरु बिन दान पुण्य जो करही।
 मिथ्या होई कभहु न फलही।।
गुरु के बिना किया धार्मिक कर्म व्यर्थ ही जाता है।
इसलिए शास्त्रों का ज्ञान समझे तथा गुरु अवश्य बनाये।

सतगुरु की पहचान 

सतगुरु की पहचान करना भक्ति मार्ग में बहुत जरूरी होता है।। वर्तमान में इस संसार मे गुरुओं की बाढ़ सी आ गई है इसमे सतगुरु की पहचान हमारे लिए आवश्यक है। सतगुरु की पहचान उनकी वेषभुषा या ऊपरी पहनावे से नही कर सकते। लेकिन सच्चे सतगुरु की पहचान करना बहुत आसान है अगर हम शास्त्रों का सहारा लेकर पहचान की जाए तो।  
कबीर साहेब जी ने अपनी वाणियो में बताया है कि-
 सतगुरु के लक्षण कहूँ मधुरे बेन विनोद।
 चार वेद छ सास्त्र कहे अठारह बोध।।

कबीर साहेब जी कहते हैं कि सतगुरु उसे जानो जो चार वेद, 6 सास्त्र ओर अठारह बोध यानी सभी सद्ग्रन्थों को ज्ञान बताये तथा सास्त्र अनुसार भक्ति बताये वह सतगुरु होता है। 
  
गीता अध्याय 15 स्लोकः 1 से लेकर 4 तक सतगुरु की पहचान बताई है ।  ऊपर को जड़ व नीचे को साखा वाले अविनाशी पेड़ के सभी विभाग जो बता दे वही वेदों को जानने वाले सन्त होते हैं। 

सिद्ध तारे पिंड आपना, साधु तारे खण्ड।
सतगुरु सोइ जानियो जो तार देवे ब्रह्मण्ड।।
 साधु व सिद्ध केवल इस सरीर या इस खंड यानी  इस पृथ्वी को ही पार करवा सकते हैं। लेकिन कबीर साहेब जी ने बताया है कि सतगुरु वह होता है जो ब्रह्मण्डों को भी पार करवाकर परमेश्वर के निज लोक में निवास करवा दे। हम 21 ब्रह्मण्डों के स्वामी काल भगवान के लोक में रहते हैं। इनसे जो पार करवा दे वही सच्चा सतगुरु है।  कबीर साहेब जी ने बताया है कि सतगुरु व परमात्मा में कोई अंतर नही समझना चाहिए। सतगुरु परमात्मा का ही रूप होता है।  परमेश्वर कौन है ? कैसा है? कहाँ रहता है? यह जानकारी जो सन्त बता दे वही सतगुरु होता है। 

वर्तमान मे सच्चा/ पूर्ण सतगुरु कौन है?

 एक समय मे एक ही सतगुरु होता है और वह केवल ज्ञान से ही पहचाना जा सकता है । वह पूर्ण सन्त या तत्वदर्शी सन्त केवल सन्त रामपाल जी महाराज है जो शास्त्रों के आधार पर पूर्ण रूप से खरे उतरते। वर्तमान में सन्त रामपाल जी महाराज जी के अतिरिक्त किसी के पास वास्तविक भक्ति मार्ग नही है। सतगुरु में जो गुण होने चाहिए वे सन्त रामपाल जी महाराज जी मे विद्यमान है। उन्होंने ही गीता अध्याय 15 स्लोकः 1 से लेकर 4 तक के श्लोकों का सही सही उत्तर बताये है।
जीवनकाल में गुरु बनाना बहुत महत्वपूर्ण  है। परमेश्वर पूर्ण सतगुरु मनुष्य का मार्गदर्शक है, सच्चे गुरु की पहचान करें।   गुरु बनाना बहुत जरूरी है
 सन्त रामपाल जी महाराज जी ने बताया कि-

अक्षर पुरुष एक पेड़ है निरंजन वाकी डार ।
तीनो देवा साखा है पात रूप संसार।।

ऊपर को जड़ रूपी परमात्मा है  उसके नीचे तना जो जमीन से बाहर की तरफ होता है वह अक्षर पुरुष यानी परब्रह्म है।  परब्रह्म से नीचे ब्रह्म है जिसे काल भी कहते हैं। उनसे नीचे तीन टहनियां जो तीनो देवता रूपी तीन गुण है। फिर अन्य छोटी टहनियां व पत्ते संसार कहा गया है। सन्त रामपाल जी महाराज सर्व धर्मो के सद्ग्रन्थों को सही सही बता रहे है। 
तथा शास्त्रों में वर्णित विधि अनुसार तीन बार मे तीन मन्त्रो की दीक्षा देते हैं। जिनका प्रमाण  गीता अध्याय 17 स्लोकः 23 में है।  सन्त रामपाल जी महाराज ही एक मात्र धरती पर पूर्ण सन्त है जो सृष्टि की रचना के बारे में सही सही बताये है। 

वेदों में लिखा है कि पूर्ण सन्त से नाम दीक्षा लेकर भक्ति करने से साधक के सर्व पाप नाश होते हैं।  सन्त रामपाल जी महाराज जी से दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करते हैं उनके पाप कर्म नाश होते हैं। तथा शारीरिक व आर्थिक लाभ भी प्राप्त होते हैं।

सन्त रामपाल जी महाराज ने सभी अनुयाईयों को अच्छे संस्कार युक्त बनाये है जिनकी समाज मे अलग पहचान बन गई है। 
पूर्ण गुरु सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा बताया गया ज्ञान जरूर देखें साधना TV पर शाम 7:30 से 


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गुरु के बिना मुक्ति नही है।